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शहर में 45 साल पहले शुरू हुई थी शरद पूर्णिमा पर राधा-कृष्ण को बड़े तालाब में नौका विहार कराने और शोभायात्रा निकालने की परंपरा

शहर में शरद पूर्णिमा की रात बड़े तालाब में भगवान राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं को नौका विहार कराने की परंपरा 45 साल पुरानी है। इसके पहले घोड़ा नक्कास स्थित प्राचीन राधा-कृष्ण मंदिर से एक डोल में विराजमान कर प्रतिमाओं को कमला पार्क स्थित शीतलदास की बगिया घाट ले जाया जाता था, पर भगवान की शोभायात्रा निकालने और उन्हें नौका विहार कराने की शुरुआत वर्ष 1973 में उस वक्त अध्यक्ष रहे पं. चतुरनारायण शर्मा ने की थी। इसके पीछे उद्देश्य था कि समिति दशहरा चल समारोह निकालकर युवाओं को मर्यादा पुरुषोत्तम राम के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा तो देती है, वहीं, इसके साथ क्यों न शरदोत्सव मनाकर श्रीकृष्ण के कर्म योग का पाठ भी उन्हें पढ़ाया जाए। इस आयोजन के बहाने युवाओं को संगठित करना भी प्रयोजन में शामिल था, जिसकी उस दौर में इसलिए जरूरत थी कि तब शहर के अधिकांश धार्मिक व सामाजिक आयोजनों के कर्ता-धर्ता बुजुर्ग ही हुआ करते थे। ऐसे आया विचार: पूर्व अध्यक्ष पं. शर्मा ने बताया कि घोड़ा नक्कास स्थित प्राचीन राधा-कृष्ण मंदिर से भगवान की प्रतिमाएं शीतलदास की बगिया ले जाई जाती थी। वहां चांदनी रात में भगवान की पूजा...