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Showing posts from January, 2019

जॉर्ज फ़र्नांडिस कुछ कर गुज़रने को बेचैन रहते थे- नज़रिया

जॉर्ज साहब अर्थात जॉर्ज फ़र्नांडिस का जाना हमारी मौजूदा राजनीति के एक दौर का अंत है. इस लेखक के लिए चालीस साल से ज़्यादा समय उनकी धारा की वैचारिक राजनीति में कभी प्रेम कभी लड़ाई करने के बाद उनका जाना यह काफ़ी कुछ निजी नुकसान भी लगता है. पर जिस हालत वे पिछले कई वर्षों से पड़े थे वह उनकी शख़्सियत के हिसाब से ज़माना लग रहा है, वरना जॉर्ज ज़िंदा हों और इतने वर्ष कुछ बड़ा न हो यह असंभव था. कर्नाटक के एक पादरी परिवार के इस व्यक्ति ने परिवार से, समाज से बगावत करके ही समाजवादी राजनीति शुरू की, वह भी मुंबई में और सीधे एसके पाटिल से भिड़े और धूल चटा दी. जॉर्ज तब क्या रहे होंगे इसकी एक झलक तब भी दिखी जब इंदिरा गांधी रायबरेली से हारने के बाद कर्नाटक के बेल्लारी से उपचुनाव लड़ने गईं और जॉर्ज साहब ने विपक्ष का अभियान संगठित किया. मुंबई में जमने और राजनीति जमाने के तो अनगिनत किस्से हैं. पर यह सब उनकी दिलेरी, समझ, जबरदस्त भाषण कला और समाज के लिए कुछ करने की जबरदस्त इच्छाशक्ति से संभव हुआ. वे चुनाव लड़ने मुंबई नहीं गए थे. उनको ट्रेड यूनियन करना था और सारे स्थापित दलों -जिनमें कम्युनिस्ट और ...

दिल्ली सरकार के रोज़गार मेले की क्या है हक़ीक़त: ग्राउंड रिपोर्ट

21 जनवरी, दिन सोमवार, सुबह के दस बजे हैं. दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम के बाहर भीड़ धीरे-धीरे बढ़ने लगी है. गेट नंबर सात के सामने हज़ारों युवा हाथों में सर्टिफ़िकेट और मार्कशीट लिए पंक्तिबद्ध खड़े हैं. उनकी यह कतार बढ़ते-बढ़ते क़रीब आधा किलोमीटर लंबी हो चुकी है. त्यागराज स्टेडियम आज एक ऐसे कैन्वस में बदल चुका है जिस पर देश में फैली 'बेरोज़गारी की तस्वीर' साफ़ देखी जा सकती है. यहां दो दिवसीय ' विशाल रोज़गार मेला' चल रहा है जिसमें भाग लेने दिल्ली और आसपास के हज़ारों बेरोज़गार युवा पहुँच रहे हैं. स्टेडियम के बाहर दिल्ली पुलिस के जवान तैनात हैं जो हर आने वाले की तलाशी लेने के बाद उन्हें अंदर भेज रहे हैं. अंदर पहुँचते ही एक बड़ा-सा फ़्लेक्स लगा है जिसके इर्द-गिर्द लोग भीड़ लगाए खड़े हैं. यह फ़्लेक्स लोगों को निर्देशित कर रहा है कि उनकी योग्यता के अनुसार उन्हें नौकरी पाने के लिए किस दिशा में बढ़ना है. इस फ़्लेक्स से मार्गदर्शन लेकर लोग अलग-अलग स्टॉल की ओर बढ़ रहे हैं. अलग-अलग कंपनियों के क़रीब 75 स्टॉल यहां लगे हैं. दिल्ली के श्रम मंत्री गोपाल राय के अनुसार इस रोज़गार...

中国一带一路再添麻烦 吉尔吉斯爆反华示威

中亚国家吉尔吉斯(又译:吉尔吉斯斯坦 )再次爆发反华示威。数百名示威者在首都比什凯克(Bishkek)游行,抗议中国近年在当地不断增加的影响力,人数是近月最多。 数百名示威者在周三(1月17日)的游行提出多个要求,其中包括要求当局驱逐来自中国的非 法入境者,减少吉尔吉斯对中国的负债比率 ,禁止当地人与中国人通婚,又要求当局彻查去年当地一家由中国公司负责维修的发电厂倒塌事故。 示威者在当局批准的游行时间过后仍然未散去 ,他们更慢慢向总统办公室和国会所在建筑物 进发,与在场警员爆发冲突。当局没有透露有多少人被捕,法新社报道说警方拘捕了21人。 吉尔吉斯近月发生多场针对中国的示威。吉尔吉斯总统热恩别科夫(Sooronbay Jeenbekov)曾警告要惩罚游行组织者,指他们的举动“ 损害国家与中国的关系”。 吉尔吉斯上海合作组织八大成员之一,也是中国主导的“一带一路”计划的签字国。 与中国公司的“腐败协议” 百多名示威者上月在中国驻吉尔吉斯的大使馆外示威, 要求中国释放所有在新疆“再教育 营”被扣的吉尔吉斯公民。 数十名示威者1月7 日又在当地官方 电视和电台大楼外示威,要求当局收紧给予中国人吉尔吉斯公民权的政策。 吉尔吉斯国内对谁挑起这些示威仍然有许多说法。BBC国际媒体观察部的分析指出,一个声称由来自东突 厥斯坦维族回教徒组成的组织在社 交网站发布视频,呼吁“把中国人从吉尔吉斯赶出去”,指大量中国人流入是为了把吉尔吉斯变成“中国的殖民地”。 另一个自称为“真相”的组织也在社交网站发布文章,指责前总统阿坦巴耶夫(Almazbek Atambayev)任内与中国公司签署许多“腐败的协议” ,阿坦巴耶夫为了让示威者迁怒于中国, 发动这次示威。 吉尔吉斯媒体引述俄罗斯牵头的独联体反恐中心(Commonwealth of Independent State Anti- terrorist Centre)的前主任伊曼库洛夫 (Marat Imankulov)分析,吉尔吉斯公众对阿坦巴耶夫与中国公司签订的协议日渐不满, 但他没有说明是哪些中国公司。 路透社报道,吉尔吉斯国内对华不满情绪自去年发电厂倒塌事故后开始升温。总部设于中国新疆的特变电 工当年获得价值四亿美元合约, 翻新比什凯克的发电厂,但工程完成数个月后发电厂就倒塌,令比什凯克停电五...

आम श्रद्धालुओं के लिए खोला गया अक्षयवट का द्वार, योगी ने पूजा की

कुंभ मेले में गुरुवार से अक्षयवट आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां पूजा-अर्चना की। अक्षयवट की परिक्रमा लगाई। यहां से वे सरस्वती कूप पहुंचे, जहां सरस्वती मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भाग लिया। यहां सेना के पुजारियों ने पूजा-पाठ कराया। योगी ने कूप में कराए गए विकास कार्यों का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने संगम तट पर समारोह में स्वच्छाग्रहियों को सम्मानित किया और किट बांटी। प्रयागराज के पश्चिमी छोर पर स्थित खुसरोबाग का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकार्पण किया। मुख्य प्रवेश मार्ग के सुंदरीकरण और पाथ-वे का भी लोकार्पण किया। सरकार ने 1264.10 लाख रुपए के बजट से इस बाग का आधुनिकीकरण, सुदृढ़ीकरण व सौंदर्यीकरण कराया है। योगी ने पौराणिक महत्व वाले प्राचीन अक्षयवट को आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोलने का ऐलान किया। उन्होंने कहा- प्रयागराज के द्वादस माधौ में से एक संगम तट पर स्थित अक्षय वट को खोलने से परंपरा को एक नई गति और दिशा मिलेगी। 16 दिसंबर को कुंभ के कार्यों का लोकार्पण करने आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्षों से चली ...

सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा सुनवाई की इजाजत दी, सरकार ने दर्ज कराई थी शिकायत

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तीन साल बाद राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) में लंबित नेस्ले के मैगी मामले में कार्यवाही की अनुमति दे दी। जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने आयोग से कहा कि मैगी के नमूनों के बारे में मैसूर स्थित केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी संस्थान (सीएफटीआरआई) की रिपोर्ट कार्यवाही का आधार बनेगी। पहले सुप्रीम कोर्ट ने ही लगाई थी सुनवाई पर रोक उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने 2015 में नेस्ले इंडिया के खिलाफ एनसीडीआरसी में शिकायत दर्ज कराई थी। मंत्रालय ने यह शिकायत तीन दशक पुराने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज कराई थी और कंपनी से 640 करोड़ रुपए का हर्जाना मांगा था। सरकार के इस कदम पर नेस्ले इंडिया ने अक्टूबर 2015 में आपत्ति दर्ज कराई थी। उसका कहना था कि सरकार जो आरोप लगा रही है उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट 13 अगस्‍त 2 015 को खारिज कर चुका है। उसके वकीलों का कहना था कि मैगी में तय मानक से अधिक लेड नहीं है। कंपनी ने जताई थी आपत्ति नेस्ले इंडिया की इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने एनएसडीआरसी की ओर से की जा रही सुनवाई पर रोक लगा दी थी। बॉम्बे हाईको...