आम श्रद्धालुओं के लिए खोला गया अक्षयवट का द्वार, योगी ने पूजा की
कुंभ मेले में गुरुवार से अक्षयवट आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां पूजा-अर्चना की। अक्षयवट की परिक्रमा लगाई। यहां से वे सरस्वती कूप पहुंचे, जहां सरस्वती मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भाग लिया। यहां सेना के पुजारियों ने पूजा-पाठ कराया। योगी ने कूप में कराए गए विकास कार्यों का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने संगम तट पर समारोह में स्वच्छाग्रहियों को सम्मानित किया और किट बांटी।
प्रयागराज के पश्चिमी छोर पर स्थित खुसरोबाग का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकार्पण किया।
मुख्य प्रवेश मार्ग के सुंदरीकरण और पाथ-वे का भी लोकार्पण किया।
सरकार ने 1264.10 लाख रुपए के बजट से इस बाग का आधुनिकीकरण, सुदृढ़ीकरण व सौंदर्यीकरण कराया है।
योगी ने पौराणिक महत्व वाले प्राचीन अक्षयवट को आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोलने का ऐलान किया।
उन्होंने कहा- प्रयागराज के द्वादस माधौ में से एक संगम तट पर स्थित अक्षय वट को खोलने से परंपरा को एक नई गति और दिशा मिलेगी।
16 दिसंबर को कुंभ के कार्यों का लोकार्पण करने आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्षों से चली आ रही इस मांग को पूरा करने की स्वीकृति दी थी।
कहा- साढ़े 450 वर्षों से जो भावनाएं दबी हुईं थीं, उनको एक नया संबल प्राप्त होगा।
संस्कृत विभाग की ओर से कुंभ पर बनी लघु फिल्म एवं काफी टेबल बुक का विमोचन किया। बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखाओं और एटीएम का उद्घाटन किया।
यहां बीओबी के अलावा एसबीआई, पीएनबी, यूनियन, इलाहाबाद बैंक के 40 एटीएम स्थापित किए गए हैं।
सीएम ने मीडिया सेंटर का उद्घाटन किया। इस सेंटर के जरिए देश विदेश से आने वाली मीडिया को वाईफाई, एडिटिंग, हाई स्पीड इंटरनेट की सुविधा मिलेगी। यहां कॉफ्रेंस हॉल व रेस्टोरेंट की भी सुविधा है।
अक्षय वट कहां स्थित है?
प्रयागराज में अकबर के किले में अक्षट वट स्थित है। ऐसा कहा जाता है कि इस पेड़ पर चढ़कर लोग मोक्ष की कामना और पाप से मुक्ति के लिए यमुना नदी में कूद कर जान दे देते थे। इस परंपरा पर अकबर ने रोक लगा दी थी। इसके बाद यह किला बंद कर दिया गया। ब्रिटिश काल में यह किला अंग्रेजों के अधीन रहा। स्वतंत्रता के बाद किले की देखरेख सेना कर रही है। यहां सेना का आयुध सेंटर है। सेना के पुजारी ही पूजा-अर्चना करते हैं। आम लोगों के दर्शन के लिए लंबे समय से मांग उठाई जा रही थी।पिछले दिनाें मोदी ने अक्षय वट और सरस्वती कूप आम श्रद्धालुओं को खोलने पर सहमति जताई थी। सरस्वती कूप के बारे में कहा जाता है कि यहीं से सरस्वती नदी जाकर गंगा-यमुना में मिलती थी।
कुंभ पर विशेष टिकट जारी
राज्यपाल राम नाइक का प्रयागराज दौरा निरस्त हो गया। मुख्यमंत्री ने अरैल स्थित सांस्कृतिक ग्राम, ग्राम कला का उद्घाटन किया। चलो मन गंगा यमुना तीरे कार्यक्रम में भी शामिल हुए। इस दौरान इलाहाबाद संग्रहालय की प्रदर्शनी और संग्रहालय के कुंभ विशेष डाक टिकट को भी जारी किया।
श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन की पेशवाई गुरुवार को मुंशीराम की बगिया मुट्ठीगंज से शाही अंदाज में बैंड बाजे के साथ निकाली गई। इसमें गुरु ग्रंथ साहिब की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। पेशवाई में अखाड़े के तमाम संत शामिल हुए। अखाड़ा शिविर पहुंचने पर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि जी महाराज और मेला प्रशासन के अफसरों ने परंपरागत तरीके से जुलूस का स्वागत किया।
प्रयागराज के पश्चिमी छोर पर स्थित खुसरोबाग का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकार्पण किया।
मुख्य प्रवेश मार्ग के सुंदरीकरण और पाथ-वे का भी लोकार्पण किया।
सरकार ने 1264.10 लाख रुपए के बजट से इस बाग का आधुनिकीकरण, सुदृढ़ीकरण व सौंदर्यीकरण कराया है।
योगी ने पौराणिक महत्व वाले प्राचीन अक्षयवट को आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोलने का ऐलान किया।
उन्होंने कहा- प्रयागराज के द्वादस माधौ में से एक संगम तट पर स्थित अक्षय वट को खोलने से परंपरा को एक नई गति और दिशा मिलेगी।
16 दिसंबर को कुंभ के कार्यों का लोकार्पण करने आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्षों से चली आ रही इस मांग को पूरा करने की स्वीकृति दी थी।
कहा- साढ़े 450 वर्षों से जो भावनाएं दबी हुईं थीं, उनको एक नया संबल प्राप्त होगा।
संस्कृत विभाग की ओर से कुंभ पर बनी लघु फिल्म एवं काफी टेबल बुक का विमोचन किया। बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखाओं और एटीएम का उद्घाटन किया।
यहां बीओबी के अलावा एसबीआई, पीएनबी, यूनियन, इलाहाबाद बैंक के 40 एटीएम स्थापित किए गए हैं।
सीएम ने मीडिया सेंटर का उद्घाटन किया। इस सेंटर के जरिए देश विदेश से आने वाली मीडिया को वाईफाई, एडिटिंग, हाई स्पीड इंटरनेट की सुविधा मिलेगी। यहां कॉफ्रेंस हॉल व रेस्टोरेंट की भी सुविधा है।
अक्षय वट कहां स्थित है?
प्रयागराज में अकबर के किले में अक्षट वट स्थित है। ऐसा कहा जाता है कि इस पेड़ पर चढ़कर लोग मोक्ष की कामना और पाप से मुक्ति के लिए यमुना नदी में कूद कर जान दे देते थे। इस परंपरा पर अकबर ने रोक लगा दी थी। इसके बाद यह किला बंद कर दिया गया। ब्रिटिश काल में यह किला अंग्रेजों के अधीन रहा। स्वतंत्रता के बाद किले की देखरेख सेना कर रही है। यहां सेना का आयुध सेंटर है। सेना के पुजारी ही पूजा-अर्चना करते हैं। आम लोगों के दर्शन के लिए लंबे समय से मांग उठाई जा रही थी।पिछले दिनाें मोदी ने अक्षय वट और सरस्वती कूप आम श्रद्धालुओं को खोलने पर सहमति जताई थी। सरस्वती कूप के बारे में कहा जाता है कि यहीं से सरस्वती नदी जाकर गंगा-यमुना में मिलती थी।
कुंभ पर विशेष टिकट जारी
राज्यपाल राम नाइक का प्रयागराज दौरा निरस्त हो गया। मुख्यमंत्री ने अरैल स्थित सांस्कृतिक ग्राम, ग्राम कला का उद्घाटन किया। चलो मन गंगा यमुना तीरे कार्यक्रम में भी शामिल हुए। इस दौरान इलाहाबाद संग्रहालय की प्रदर्शनी और संग्रहालय के कुंभ विशेष डाक टिकट को भी जारी किया।
श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन की पेशवाई गुरुवार को मुंशीराम की बगिया मुट्ठीगंज से शाही अंदाज में बैंड बाजे के साथ निकाली गई। इसमें गुरु ग्रंथ साहिब की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। पेशवाई में अखाड़े के तमाम संत शामिल हुए। अखाड़ा शिविर पहुंचने पर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि जी महाराज और मेला प्रशासन के अफसरों ने परंपरागत तरीके से जुलूस का स्वागत किया।
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