चीन से चाय उगाने का राज़ कैसे चुराया अंग्रेज़ों ने?
या तो उस्तरा इतना कुंद था या फिर कुली ही ऐसा अनाड़ी था कि फ़ॉर्च्यून को लगा कि 'जैसे वह मेरा सिर मूंड नहीं रहा बल्कि खुरच रहा है.' उसकी आंखों से आंसू जारी होकर गालों पर ढुलकने लगे. यह घटना सिंतबर 1848 में चीनी शहर शंघाई से कुछ दूर हुई थी. फ़ॉर्च्यून ईस्ट इंडिया कंपनी का जासूस था जो चीन के अंदरूनी इलाक़ों में जाकर वहां से चाय की पत्तियां चुराने के काम पर आया हुआ था. लेकिन उस मक़सद के लिए उन्हें सबसे पहले भेष बदलना था जिसकी पहली शर्त है कि वह चीन रिवाज के मुताबिक़ माथे के ऊपरी हिस्से से बाल मुंडवा लें. इसके बाद फ़ॉर्च्यून के बालों में एक चोटी जोड़ दी गई और चीनी वस्त्र पहना दिए गए. साथ ही उन्हें कहा गया कि वह अपना मुंह बंद रखें. हालांकि, एक दिक्कत और थी जिसे छिपाना आसान नहीं था. फ़ॉर्च्यून का क़द आम चीनियों के मुक़ाबले एक फ़ुट से भी लंबा था. उसका हल उन्होंने कुछ यूं निकाला कि लोगों से कह दिया जाएगा कि वह चीन की दीवार के दूसरी ओर से आए हैं जहां के लोग लंबे होते हैं. इस काम में बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ था. अगर फ़ॉर्च्यून कामयाब हो जाता तो चाय पर चीन का हज़ारों साल का आध...