मुंगेर: चुनाव में बाहुबलियों का ज़ोर, पर मुद्दों से बंदूक बनाने वाले गायब
"पहले यहां बहुत मज़दूर थे तो नेता सब वोट के लिए खुशामद करने आते थे. अब यहां सिर्फ 50 मजदूर आते हैं, तो नेता सब क्यों आएंगे. हम मरे हुए लोग हैं." 94 साल पुरानी बंदूक बनाने वाली कंपनी के मालिक नवल चन्द्र राणा ने बहुत लाचारगी से ये बात कही. वो और उनके जैसे कई बंदूक कंपनियों के मालिक मुंगेर किला क्षेत्र के गन फैक्ट्री इंडस्ट्रियल एऱिया में एक पेड़ के नीचे बैठे है. बेकाम और बेगार जैसे. तकरीबन एक किलोमीटर के दायरे में फैले इस इंडस्ट्रियल एरिया में कभी 36 बंदूकें बनाने वाली कंपनियां थी. लेकिन अब यहां सन्नाटा पसरा है. सिर्फ फाइजर गन मैन्युफैक्चरिंग कंपनी में ही अभी बंदूक बनाने का काम चल रहा है. बीबीसी की टीम वहां पहुंची तो मोबाइल पर "बाजीगर मैं बाजीगर....." गाना बज रहा था. पास ही में बंदूक का एक पुर्जा बना रहे महेश कहते है, "हमने जिंदगी भर बंदूक ही बनाई लेकिन अब बंदूक बनाने का काम ही नहीं रहा. अब तो जिस दिन 200 रुपए कमा ले, उस दिन सुकून है." कभी मुंगेर में बंदूक कारखाने में 1800 से ज्यादा कारीगर थे लेकिन अब महज 50 रह गए हैं. मुंगेर के आस पास के इलाकों के ...