लोकसभा चुनाव 2019: पुलवामा और बालाकोट के बाद कितनी बदली विपक्ष की सियासत
इसी साल फरवरी में जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए चरमपंथी आत्मघाती हमले और उसके बाद पाकिस्तान में भारतीय वायु सेना की कार्रवाई की ख़बर के बाद भारत में राजनीतिक माहौल बदला है. इस बदले हुए राजनीतिक माहौल में विपक्ष की रणनीति और गठबंधन के समीकरण भी बदल रहे हैं.
लोकसभा सीटों के लिहाज़ से सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और लोकदल के गठबंधन ने कांग्रेस पार्टी के लिए दो सीटें छोड़ी हैं- रायबरेली और अमेठी.
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव कह चुके हैं कि इन सीटों को छोड़ने का मतलब यही है कि कांग्रेस भी गठबंधन में शामिल है लेकिन कांग्रेस सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कह चुकी है.
इन सबके बीच क्या बदले राजनीतिक माहौल में गठबंधन के गणित में कोई बदलाव हो सकता है?
बहुजन समाज पार्टी के प्रवक्ता सुधींद्र भदौरिया कहते हैं, "जहां हमारी ताक़त है अगर कांग्रेस हमें वहां सीटें देती है तो हम कांग्रेस को बदले में सीटें क्यों नहीं देंगे? बिल्कुल देंगे."
भदौरिया का मतलब राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से है जहां बहुजन समाज पार्टी उम्मीदवार तो उतारती रही है लेकिन उसे बड़ी जीत नहीं मिली है.
वो कहते हैं, "अभी विधानसभा चुनावों में हमें मध्य प्रदेश में सात प्रतिशत वोट मिला है, छह विधायक हमारे राजस्थान में जीते हैं. छत्तीसगढ़ में भी हमारा प्रतिशत ठीक-ठाक है. अगर हमारे इस जनमत का सम्मान गठबंधन में किया जाता है तो बात आगे ज़रूर बढ़ सकती है. अगर सम्मानजनक समझौता करेंगे तो समझौता क्यों नहीं होगा?"
भदौरिया ये तो स्वीकार करते हैं कि पुलवामा हमले के बाद देश का राजनीतिक माहौल बदला है लेकिन वो ये नहीं मानते कि इससे यूपी के गठबंधन पर कुछ असर होगा. वो कहते हैं, "अगर कोई आना चाहता है तो अखिलेश जी और मायावती जी से बात करे, स्वागत है. बात करने से ही बात होगी."
कांग्रेस का रुख़
वहीं कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला इस सवाल पर कहते हैं, "सपा हो या बसपा, राजनीतिक विचारों पर हमारी भिन्नता हो सकती है, लेकिन देशहित में अनेक मुद्दों पर हमारी समानता भी है. सपा और बसपा ने कांग्रेस का इंतज़ार किए बिना सभी सीटों का निर्णय अपने आप कर लिया, हमसे तो बात ही नहीं की."
"आज भी अगर सपा और बसपा खुले मन से चाहेंगे तो कांग्रेस पार्टी अवश्य विचार करेगी क्योंकि हम चाहते हैं कि हम सभी राजनीतिक दलों को एक मंच पर लाकर देश को मज़बूत करें."
रणदीप सुरजेवाला कहते हैं, "हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति के ख़िलाफ़ नहीं है, न नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ न किसी और के ख़िलाफ़. हमारी लड़ाई उस विध्वंसकारी, नफ़रत से भरी हुई और बांटने वाली विचारधारा के ख़िलाफ़ है जिसका प्रतिनिधित्व नरेंद्र मोदी करते हैं."
सुरजेवाला ये स्वीकार करते हैं कि बीते कुछ दिनों में देश का राजनीतिक माहौल बदला है. भाजपा पर निशाना साधते हुए वो कहते हैं, "देश का राजनीतिक माहौल दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से सेना की शहादत के पीछे छुपे प्रधानमंत्री की राजनीति से प्रभावित हो रहा है."
सुरजेवाला कहते हैं कि उनकी पार्टी देश में बेरोज़गारी, रोज़ी-रोटी, किसान-मज़दूरों, छोटे उद्यमियों और दुकानदारों के मुद्दा उठाकर इस राजनीति का जबाव देगी.
वो कहते हैं, "इस देश में प्रजातंत्र, संवैधानिक परिपाटी और लोगों की रोजी-रोटी और जीवन को बचाने के लिए हम सबको एकजुट होकर हम सबको एक अहंकारी शासक और अहंकारी सरकार से मुक़ाबला करने की आवश्यकता है."
कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी के प्रवक्ता भले ही गठबंधन में गुंज़ाइश के संकेत दे रहो हों लेकिन समाजवादी पार्टी का स्पष्ट कहना है कि जो तय हो गया है वही अंतिम है.
समझदार जनता पर सबका भरोसा
पार्टी के वरिष्ठ नेता और अखिलेश यादव के सलाहकार राजेंद्र चौधरी कहते हैं, "पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव स्पष्ट कर चुके हैं कि हमने दो सीटें कांग्रेस के लिए छोड़ दी हैं और इसी आधार पर हम मानते हैं कि कांग्रेस भी गठबंधन में शामिल है. सपा, बसपा और लोकदल का गठबंधन ही उत्तर प्रदेश में विपक्ष की मुख्यधारा है और इसी के साथ वो मतदाता भी हैं जो सत्ता के ख़िलाफ़ हैं या सत्ता के सताए हुए हैं."
यादव कहते हैं, "गठबंधन में आगे किसी तरह के बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं है. न ही गठबंधन को लेकर कोई नई बातचीत चल रही है."
राजेंद्र यादव इस बात को स्वीकार नहीं करते हैं कि पुलवामा हमले और पाकिस्तान में भारतीय वायुसेना की कार्रवाई का चुनावों पर कोई बड़ा असर होगा.
वो कहते हैं, "जनता सच्चाई जानती है. विपक्ष ने शहीदों के बलिदान को सराहा है. कोई एक राजनीतिक दल सेना का शौर्य लेने का दावा नहीं कर सकता है. जनता समझदार है और वो चुनावों में सेना के नाम के इस्तेमाल को भी समझती है."
क्या कांग्रेस कन्फ्यूज़्ड है?
उत्तर प्रदेश में जब महागठबंधन की बात शुरू हुई थी तब माना गया था कि कांग्रेस, सपा और बसपा साथ आएंगे, लेकिन अब कांग्रेस के लिए दो सीटें तो छोड़ी गईं हैं मगर उसे बड़े गठबंधन में शामिल नहीं किया गया है.
इसकी वजह बताते हुए सुधींद्र भदौरिया कहते हैं, "कांग्रेस इस समय अलग मोड में हैं. कांग्रेस का ज़ोर इस समय अपनी पार्टी को बढ़ाने पर है न की मोदी को हराने पर जबकि ये अपनी पार्टी बढ़ाने का नहीं बल्कि मोदी को हराने का समय है."
जब ये सवाल रणदीप सुरजेवाला से किया गया तो उन्होंने कहा, "विनम्रता का दूसरा सार ही कांग्रेस है, राहुल गांधी झुककर आगे बढ़ना जानते हैं. दूसरे दल हमें लेकर ग़लतफ़हमी में हो सकते हैं, हममें किसी तरह का अक्खड़पन नहीं है."
वो कहते हैं, "हम इस बात से सहमत नहीं है कि गठबंधन हमारी वजह से नहीं हो रहा है. महाराष्ट्र में हमारा गठबंधन हो गया है. कर्नाटक, बिहार, और केरल में भी हमारा गठबंधन हो गया है. यूपी में दो छोटी पार्टियों से भी हमारा गठबंधन हो गया है. कांग्रेस पार्टी ने उदार दिल से लेन-देन के आधार पर गठबंधन किया है. हम बाकी जगह भी, जहां-जहां संभव होगा वहां अन्य दलों को साथ लेकर आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं."
लोकसभा सीटों के लिहाज़ से सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और लोकदल के गठबंधन ने कांग्रेस पार्टी के लिए दो सीटें छोड़ी हैं- रायबरेली और अमेठी.
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव कह चुके हैं कि इन सीटों को छोड़ने का मतलब यही है कि कांग्रेस भी गठबंधन में शामिल है लेकिन कांग्रेस सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कह चुकी है.
इन सबके बीच क्या बदले राजनीतिक माहौल में गठबंधन के गणित में कोई बदलाव हो सकता है?
बहुजन समाज पार्टी के प्रवक्ता सुधींद्र भदौरिया कहते हैं, "जहां हमारी ताक़त है अगर कांग्रेस हमें वहां सीटें देती है तो हम कांग्रेस को बदले में सीटें क्यों नहीं देंगे? बिल्कुल देंगे."
भदौरिया का मतलब राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से है जहां बहुजन समाज पार्टी उम्मीदवार तो उतारती रही है लेकिन उसे बड़ी जीत नहीं मिली है.
वो कहते हैं, "अभी विधानसभा चुनावों में हमें मध्य प्रदेश में सात प्रतिशत वोट मिला है, छह विधायक हमारे राजस्थान में जीते हैं. छत्तीसगढ़ में भी हमारा प्रतिशत ठीक-ठाक है. अगर हमारे इस जनमत का सम्मान गठबंधन में किया जाता है तो बात आगे ज़रूर बढ़ सकती है. अगर सम्मानजनक समझौता करेंगे तो समझौता क्यों नहीं होगा?"
भदौरिया ये तो स्वीकार करते हैं कि पुलवामा हमले के बाद देश का राजनीतिक माहौल बदला है लेकिन वो ये नहीं मानते कि इससे यूपी के गठबंधन पर कुछ असर होगा. वो कहते हैं, "अगर कोई आना चाहता है तो अखिलेश जी और मायावती जी से बात करे, स्वागत है. बात करने से ही बात होगी."
कांग्रेस का रुख़
वहीं कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला इस सवाल पर कहते हैं, "सपा हो या बसपा, राजनीतिक विचारों पर हमारी भिन्नता हो सकती है, लेकिन देशहित में अनेक मुद्दों पर हमारी समानता भी है. सपा और बसपा ने कांग्रेस का इंतज़ार किए बिना सभी सीटों का निर्णय अपने आप कर लिया, हमसे तो बात ही नहीं की."
"आज भी अगर सपा और बसपा खुले मन से चाहेंगे तो कांग्रेस पार्टी अवश्य विचार करेगी क्योंकि हम चाहते हैं कि हम सभी राजनीतिक दलों को एक मंच पर लाकर देश को मज़बूत करें."
रणदीप सुरजेवाला कहते हैं, "हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति के ख़िलाफ़ नहीं है, न नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ न किसी और के ख़िलाफ़. हमारी लड़ाई उस विध्वंसकारी, नफ़रत से भरी हुई और बांटने वाली विचारधारा के ख़िलाफ़ है जिसका प्रतिनिधित्व नरेंद्र मोदी करते हैं."
सुरजेवाला ये स्वीकार करते हैं कि बीते कुछ दिनों में देश का राजनीतिक माहौल बदला है. भाजपा पर निशाना साधते हुए वो कहते हैं, "देश का राजनीतिक माहौल दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से सेना की शहादत के पीछे छुपे प्रधानमंत्री की राजनीति से प्रभावित हो रहा है."
सुरजेवाला कहते हैं कि उनकी पार्टी देश में बेरोज़गारी, रोज़ी-रोटी, किसान-मज़दूरों, छोटे उद्यमियों और दुकानदारों के मुद्दा उठाकर इस राजनीति का जबाव देगी.
वो कहते हैं, "इस देश में प्रजातंत्र, संवैधानिक परिपाटी और लोगों की रोजी-रोटी और जीवन को बचाने के लिए हम सबको एकजुट होकर हम सबको एक अहंकारी शासक और अहंकारी सरकार से मुक़ाबला करने की आवश्यकता है."
कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी के प्रवक्ता भले ही गठबंधन में गुंज़ाइश के संकेत दे रहो हों लेकिन समाजवादी पार्टी का स्पष्ट कहना है कि जो तय हो गया है वही अंतिम है.
समझदार जनता पर सबका भरोसा
पार्टी के वरिष्ठ नेता और अखिलेश यादव के सलाहकार राजेंद्र चौधरी कहते हैं, "पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव स्पष्ट कर चुके हैं कि हमने दो सीटें कांग्रेस के लिए छोड़ दी हैं और इसी आधार पर हम मानते हैं कि कांग्रेस भी गठबंधन में शामिल है. सपा, बसपा और लोकदल का गठबंधन ही उत्तर प्रदेश में विपक्ष की मुख्यधारा है और इसी के साथ वो मतदाता भी हैं जो सत्ता के ख़िलाफ़ हैं या सत्ता के सताए हुए हैं."
यादव कहते हैं, "गठबंधन में आगे किसी तरह के बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं है. न ही गठबंधन को लेकर कोई नई बातचीत चल रही है."
राजेंद्र यादव इस बात को स्वीकार नहीं करते हैं कि पुलवामा हमले और पाकिस्तान में भारतीय वायुसेना की कार्रवाई का चुनावों पर कोई बड़ा असर होगा.
वो कहते हैं, "जनता सच्चाई जानती है. विपक्ष ने शहीदों के बलिदान को सराहा है. कोई एक राजनीतिक दल सेना का शौर्य लेने का दावा नहीं कर सकता है. जनता समझदार है और वो चुनावों में सेना के नाम के इस्तेमाल को भी समझती है."
क्या कांग्रेस कन्फ्यूज़्ड है?
उत्तर प्रदेश में जब महागठबंधन की बात शुरू हुई थी तब माना गया था कि कांग्रेस, सपा और बसपा साथ आएंगे, लेकिन अब कांग्रेस के लिए दो सीटें तो छोड़ी गईं हैं मगर उसे बड़े गठबंधन में शामिल नहीं किया गया है.
इसकी वजह बताते हुए सुधींद्र भदौरिया कहते हैं, "कांग्रेस इस समय अलग मोड में हैं. कांग्रेस का ज़ोर इस समय अपनी पार्टी को बढ़ाने पर है न की मोदी को हराने पर जबकि ये अपनी पार्टी बढ़ाने का नहीं बल्कि मोदी को हराने का समय है."
जब ये सवाल रणदीप सुरजेवाला से किया गया तो उन्होंने कहा, "विनम्रता का दूसरा सार ही कांग्रेस है, राहुल गांधी झुककर आगे बढ़ना जानते हैं. दूसरे दल हमें लेकर ग़लतफ़हमी में हो सकते हैं, हममें किसी तरह का अक्खड़पन नहीं है."
वो कहते हैं, "हम इस बात से सहमत नहीं है कि गठबंधन हमारी वजह से नहीं हो रहा है. महाराष्ट्र में हमारा गठबंधन हो गया है. कर्नाटक, बिहार, और केरल में भी हमारा गठबंधन हो गया है. यूपी में दो छोटी पार्टियों से भी हमारा गठबंधन हो गया है. कांग्रेस पार्टी ने उदार दिल से लेन-देन के आधार पर गठबंधन किया है. हम बाकी जगह भी, जहां-जहां संभव होगा वहां अन्य दलों को साथ लेकर आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं."
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